वीडियो जानकारी:
शब्दयोग सत्संग
११ सितम्बर, २०१६
रमण महर्षि केंद्र, दिल्ली
प्रसंग:
होशमंद कैसे जीये?
कैसे जाने की होशमंद है या बेहोशमंद?
क्या होश में जीना ही आनंद है?
क्या हर पल होश में जीना आवश्यक है?
अध्यात्म में रस क्यों नहीं आता है?
संगीत: मिलिंद दाते